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बिहार के इस गोल्ड मेडलिस्ट पर छाया आर्थिक संकट, कर रहा फूड डिलवरी

वैसे तो कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। इंसान अगर चाहे तो अपनी मेहनत और लगने से छोटे काम को भी बड़े में तब्दील कर सकता है। वह चाहे तो अपनी परिस्थितियों में भी खुद के दमपर बदलाव ला सकता है। लेकिन कई बार समय की मार इंसान का मनोबल पूरी तरह तोड़ देती है। इन हालातों में वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता है। आज हम आपको ऐसे ही एक व्यक्ति के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने अपने अब तक के करियर में कई ऊचाइंयों को छुआ है लेकिन आज उसे अपनी आर्थिक जरुरतों को पूरा करने के लिए डिलीवरी बॉय बनकर काम करना पड़ रहा है।

धावक बनना चाहते हैं मुकेश

यह कहानी है बिहार के वैशाली में जन्में मुकेश कुमार की। मुकेश बचपन से ही एक अच्छे एथलीट बनना चाहते थे। उनका सपना था कि वे एक अच्छे धावक बनें। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बचपन से ही मेहनत करना प्रारंभ कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने स्कूल के दिनों में मुकेश ने कई कंप्टीशंस जीते। यही कारण रहा कि वे स्कूल के अध्यापकों के फेवरेट छात्रों में शामिल थे। उनके अध्यापकों का मानना था कि मुकेश आगे चलकर एक अच्छे एथलीट बनेंगे और देश का नाम रौशन करेंगे।

धीरे-धीरे मुकेश आगे बढ़ते रहे। पहले उन्होंने स्कूल लेवल पर कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया उन्हें जीता, उसके बाद डिस्ट्रिक्ट लेवल पर कई कंप्टीशंस में पार्टिसिपेट किया और जीत दर्ज की। समय के साथ उनका टैलेंट और निखरने लगा और उन्होंने स्टेट लेवल की दौड़ में दौड़ना शुरु कर दिया था। इनमें मुकेश ने जीत दर्ज कर सभी का दिल जीत लिया।
बताया जाता है कि मुकेश ने स्टेट लेवल चैंपियनशिप में जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल हांसिल किया था। इसके बाद उन्हें विशाखापत्तनम में हुए मुकाबले में भाग लेने का मौका मिला। लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से वे इसमें नहीं जीत सके और हार गए।

डिप्रेशन का शिकार हुए

इस दौरान मुकेश डिप्रेशन में चले गए थे। लेकिन उस वक्त उनका साथ उनके अध्यापकों ने दिया। उन्होंने उनके बुरे वक्त में उनकी सहायता की। उन्हें डिप्रेशन से बाहर लाने में और उन्हें मोटिवेट करने में मदद की। जानकारी के अनुसार, मुकेश के पिता की आर्थिक स्थिति भी कुछ ठीक नहीं रहती है। वे पेशे से एक किसान हैं। इसके बावजूद वे मुकेश की एथलेटिक्स प्रैक्टिस में बाधा उत्पन्न नहीं करते हैं। वे घर खर्च के साथ-साथ मुकेश का भी खर्च उठाते हैं।

जोमैटो डिलीवरी बॉय बनें मुकेश

हालांकि, पिता की बढ़ती उम्र और उनकी मजबूरियों को देखते हुए मुकेश ने दोस्तों के कहने पर फूड डिलीवरी बॉय की नौकरी ज्वाइन कर ली है। अब वे दिनभर जोमैटो के जरिये फूड डिलीवर करते हैं और रात में दौड़ की प्रैक्टिस करते हैं।
मुकेश ने अपने करियर के विषय में बात करते हुए एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उन्होंने अपनी पहली तनख्वाह से अपनी बहन के लिए जूते खरीदे थे। उनकी तरह उनकी बहन भी स्टेट लेवल चैंपियन है। वे चाहते हैं कि उनकी बहन नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के कंप्टीशंस में भाग ले। इसलिए वे अपनी तनख्वाह से कुछ पैसे उसपर खर्च करते हैं।

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