Breaking News

इस तकनीक से 3 साल पहले मिल जाएगी हॉर्ट अटैक की चेतावनी, जानिये कैसे

देश में इन दिनों सबसे अधिक मौतें हॉर्ट अटैक से हो रही हैं। खास बात यह है कि इससे न सिर्फ बुजुर्गों की मृत्यु हो रही है बल्कि नवयुवक भी इसका शिकार हो रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी तकनीक के विषय में बताने जा रहे हैं जिसके इस्तेमाल से आपको तीन साल पहले ही पता चल जाएगा कि आने वाले समय में आपको हॉर्ट अटैक आएगा या नहीं।

डॉक्टर्स के अनुसार, सीने में दर्द या अधिक बेचैनी होना हॉर्ट का सबसे बड़ा लक्षण होता है। इसके अलावा कमजोरी, गले, कमर या जबड़े में दर्द भी दिल की बीमारी के संकेत होते हैं। वहीं, अगर आपको बेचैनी या कंधे में दर्द की शिकायत अधिक होने लगे तो ऐसे में सतर्क रहने की अधिक आवश्यकता है।

दिल की बीमारी के लक्षण

चिकित्सकों के मुताबिक, दिल की बीमारी का सबसे बड़ा कारण तेलयुक्त भोजन और डर्टी लाइफस्टाइल भी है। आज के जमाने में लोग पौष्टिक आहार लेने की बजाए सुबह-शाम जंक फूड का सेवन करते हैं। इससे उनकी बॉडी में कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है जिसकी वजह से उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, आज के ज़माने में लोगों का अंदर ही अंदर किसी बात को लेकर घुटना, अधिक सोंच-विचार करना हॉर्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण है।

जानकारों के मुताबिक, आज जितने भी नवयुवक हार्ट अटैक से मर रहे हैं ये किसी न किसी बात को लेकर परेशान रहते थे जिसकी वजह से ये एक दिन डिप्रेशन का शिकार हो गए। हालांकि, इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों ने हॉर्ट अटैक को लेकर एक नई तकनीक इजात की है। इस तकनीक की मदद से आपको हॉर्ट फेल्योर होने के तीन साल पहले ही चेतावनी दे दी जाएगी।

2.5 लाख मरीजों का किया गया टेस्ट

डॉ. रमजी खमीज के मुताबिक, इसके लिए हार्ट अटैक के पुराने मरीजो के सी-रिएक्टिव प्रोटीन का टेस्ट किया गया था। इसमें उन्हें इंफ्लेमेशन के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। इसके अलावा दिल के डैमेज होने पर खून से निकलने वाले ट्रोपोनिन नामक प्रोटीन का भी स्टैंडर्ड टेस्ट किया गया। तकरीबन 2.5 लाख मरीजों के टेस्ट के बाद पाया गया कि कुछ मरीजों का सीआरपी लेवल अधिक था। वहीं, कुछ ट्रोपोनिन टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। इससे पता चला कि 3 साल में इन मरीजों में मौत का खतरा लगभग 35 फीसदी है। चिकित्सकों ने बताया कि अगर सही समय पर इसपर ध्यान न दिया जाए तो इनकी मौत हार्ट अटैक से हो सकती है।

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने उठाया रिसर्च का खर्च

गौरतलब है, इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन द्वारा की गई इस रिसर्च का खर्च उठाने वाले ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन में कार्यरत प्रोफेसर जेम्स लीपर ने इसस तकनीक को लेकर कहा कि, ‘यह डॉक्टर्स की मेडिकल किट में एक नायाब टूल साबित होगा।‘

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *