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कभी सब्जियां बेची,लेकिन अब करेगा भारत की ओर से प्रतिनिधित्व

कहते हैं टैलेंट कभी छुपता नही है.और वह समय के साथ साथ निखरता भी है और आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे खिलाड़ी की जिसने कभी अपनी जिंदगी में ठेले लगाए और चने बेचे लेकिन अब भारत की ओर से से करेगा प्रतिनिधित्व.जी हां हम बाट रहे हैं उत्तर प्रदेश के रहने वाले नीरज चौहान की जिन्होंने अपनी संघर्ष भरे इस जीवन में कभी हार नही मानी और हमेशा मेहनत करते रहे

भारत की ओर से करेंगे तीरंदाजी

दरअसल पिछले रविवार को को हरियाणा में सोनीपत में भारतीय खेल प्राधिकरण में हुए एशियाई गेमों के लिए हुए ट्रायल में उत्तर प्रदेश के नीरज ने भी भाग लिया .उन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सबको चौका दिया है. वहीं इस ट्रायल में नीरज ने तीरंदाजी में पूरे भारत में दूसरे नंबर का स्थान प्राप्त किया है.नीरज के इस अच्छे प्रदर्श की वजह से उन्हें तीरंदाजी विश्व कप समेत एशियन गेम्स के लिए घोषित भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई है.नीरज ने इस अच्छे प्रदर्श के कारण इस साल के अंत में होने वाले प्रतियोगिता के लिए भारत की ओर से प्रतिनिधितिव करेंगे.

संघर्ष भरा रहा जीवन


उत्तर प्रदेश से आने वाले नीरज की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम भी नहीं है नीरज ने यह मुकाम हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत की है .नीरज का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था जिसके कारण इनको अपनी जिंदगी में और भी परेशानी झेलनी पड़ी.आपने जिस तरह से कोरॉना महामारी ने दुनिया भर में अपना शिकंजा कसा था.और बहुत सारे लोगों के जीवन को उथल पुथल कर दिया तो उनमें से एक नीरज के पिता भी है.दरअसल नीरज के पिता की लॉकडॉन में नौकरी चली गई थी.और नीरज के घर की आर्थिक स्तिथि बेहद खराब हो गई.और ऐसे में नीरज ने अपने पिता संग सब्जी का ठेला भी लगाया.लेकिन नीरज ने अपनी तीरंदाजी नहीं छोड़ी और उन्होंने अपना पूरा ध्यान तीरंदाजी पर लगाया हुआ था.और उनके इसी मेहनत के के कारण नीरज अब भारत की ओर से प्रतिनिधितिव करने जा रहे हैं.

सरकार ने दिए पैसे


नीरज अपनी आर्थिक तंगी के कारण अपना ध्यान तीरंदाजी में नही लगा पा रहे थे.जिसके चलते उन्होंने भारतीय आर्चरी संघ के अध्यक्ष अर्जुन मुंडा से आर्थिक मदद की अपील की थी.तब अर्जुन मुंडा ने एक ट्वीट कर नीरज और उनके भाई को लेकर सरकार से अपील की थी .इसके बाद सरकार द्वारा खेल मंत्रालय की ओर से पंडित दिन दयाल उपाध्याय राष्टीय कल्याण कोष सम्मान राशि की मदद से पांच पांच लाख रुपए दिए गए.आपको बता दें की नीरज के भाई भी खेल में रुचि रखते हैं और वे बॉक्सिंग करते हैं.नीरज लगातार 8 सालों से तीरंदाजी कर रहे हैं और स्टेडियम में कोच न होने पर भी वो मेहनत करते रहते थे आपको बता दें की नीरज इससे पहले 2018और 2021 में पुणे और देहरादून में आयोजित हुए जूनियर नेशनल और सीनियर नेशनल में सिल्वर मेडल जीता था.जानकारी के लिए बता दें की नीरज को सरकार द्वारा खेल कोटा से नौकरी भी दी गई है. वहीं उनके पिता स्टेडियम के बाहर होटल चलाते हैं.

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