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स्टनेफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई छोड़कर लौटे दो दोस्तों ने खड़ी की 300 मिलियन डॉलर की कंपनी

पुराने ज़माने में एक कहावत बड़ी मशहूर थी कि इंसान को अपनी चादर देखकर ही पैर फैलाने चाहिये। यही कारण था कि उस दौर में व्यक्ति सिर्फ खाने-पीने और जीवन-यापन के विषय में ही सोंचता था। लेकिन धीरे-धीरे ज़माना बदलता गया और लोगों का नज़रिया भी बदल गया।

अब लोग मानते हैं कि अगर बड़ा सपने देखेंगे ही नहीं तो कैसे बड़े आदमी बनेंगे। इसके लिए कई बार लोगों का विरोध भी किया जाता है। उनका मज़ाक भी उड़ाया जाता है लेकिन समाज और परिवार के तानों के बावजूद जो अपने काम पर ध्यान देता है वह इस दुनिया में जरुर सफल होता है।

आज हम आपको ऐसे ही दो युवाओं के विषय में बताने जा रहे हैं जिन्होंने विदेश से लौटकर कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसपर सभी की आखें फटी की फटी रह गई हैं।

इन युवाओं का नाम है आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा। ये दोनों विश्व की सुप्रसिद्ध यूनिवर्सिटी स्टेनफोर्ड में पढ़ाई के लिए गया था। इनका दाखिला पिछले साल ही हुआ था।

लेकिन इनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। ये बचपन से कुछ ऐसा करना चाहते थे जो सबसे अलग हो। ऐसे में इन युवाओं ने बारत लौटने का फैसला किया। इन्होंने भारत लौटकर एक कंपनी की स्थापना की।

ज़ेप्टो नाम की इस कंपनी के तहत ग्रोसरीज़ से जुड़े तमाम प्रोडक्ट्स लिमिटेड टाइम में डिलीवर किये जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 वर्षीय आदित और कैवल्य के इस ऐप की वर्थ इनकम 200-300 मिलियन डॉलर के बीच है। उनके इस स्टार्टअप में वाई कॉम्बिनेटर, ग्लेड ब्रुक कैपिटल, लैची ग्रूम जैसे बड़े निवेशकों ने निवेश किया है।

बता दें, इस वक्त यह कंपनी बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में सामान डिलीवर कर रहा है। इन शहरों में कस्टमर्स तक 10 मिनट के अंदर उनका ऑर्डर पहुंच जाता है। अब ज़ेप्टो हैदराबाद, पुणे, कोलकाता और चेन्नई में भी स्टार्टअप खड़ा करने की तैयारी कर रही है।

खबरों के मुताबिक, कस्टमर्स से मिले रिव्यू के मुताबिक ज़ेप्टो कई बार 6-7 मिनट में भी प्रोडक्ट्स डिलीवर कर देता है। इसके बावजूद लेट होने पर कंपनी कस्टमर्स को उचित डिस्काउंट और इंसेंटिव देती है। इसकी खास बात यह है कि कंपनी कस्टमर्स से इसके लिए कोई चार्ज भी नहीं लेती है।

गौरतलब है, ज़ेप्टो के जरिये कस्टमर्स सुबह 7 बजे से रात 2 बजे तक किसी भी प्रोडक्ट को ऑर्डर कर उसे डिलीवर करवा सकते हैं। बता दें, तेजी से बढ़ रही इस कंपनी के लिए ग्रोफर्स, डुन्ज़ो, क्यू-कॉमर्स जैसे ब्रांड चुनौती बन रहे हैं। इन ऐप्स ने भी कस्टमर्स तक सामान पहुंचाने की टाइम लिमिट 10 मिनट कर दी है।

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