Breaking News

भारत के इस मंदिर में मिलती है प्रेमी जोड़ों को शरण, लाखों प्रेमी घर से भागकर करते हैं शादी

हिमाचल की सुंदरता किसी से छिपी नहीं है। इसकी खूबसूरती के लोग कायल रहते हैं। सैकड़ों सैलानी हर साल देश-विदेश से इसकी वादियों में छुट्टियां मनाने के लिए आते हैं। हिमाचल को उसकी सादगी के लिए जाना जाता है। यहां के लोगों की मीठी बोली और मददगार स्वभाव उन्हें बाकी दुनिया से अलग बनाता है। आज हम आपको हिमाचल की पहाड़ियों में बने एक ऐसे मंदिर के विषय में बताने जा रहे हैं जिसको लेकर कहा जाता है कि यहां आने वाले सभी प्रेमी जोड़ों की रक्षा भगवान शिव स्वयं करते हैं।

महाभारत से जुड़ा है संबंध

बता दें, इस मंदिर का नाम शंगचुल महादेव मंदिर है। कुल्लु के शांगढ़ सैंज घाटी में स्थित इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जह अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे, उस वक्त कौरवों ने उनका पीछा किया था। इस दौरान शंगचुल महादेव ने पांडवों की रक्षा की थी। भगवान शिव ने कौरवों को रोककर कहा था कि यह मेरा क्षेत्र है यहां किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, इस डर से कौरव वहां से उल्टे पांव लौट गए थे।

प्रेमी जोड़ों को मिलता है संरक्षण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मंदिर में घर से भागकर शादी करने वाले प्रेमी जोड़ों को शरण दी जाती है। इन प्रेमी जोड़ों की रक्षा, उनकी देखभाल सब मंदिर के पुजारी और गांव वाले ही करते हैं। उन्हें किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दी जाती है। जानकारी के मुताबिक, गांव वालों का मानना है कि समाज के डर से, जाति, धर्म आदि कारणों से कोई भी प्रेमी जोड़ा अगर यहां आकर शरण मांगता है तो उसे मना नहीं किया जाता है। गांव वाले प्रेमी जोड़ों की रक्षा को ईश्वर का आदेश मानते हैं।

मादक पदार्थों का सेवन है वर्जित

इसके अलावा इस गांव में शराब, सिगरेट और चमड़े से बने सामान को लेकर गुजरना वर्जित है। यहां जब भी वन विभाग के अधिकारी या स्थानीय पुलिस वाले गुजरते हैं उन्हें टोपी और बक्सा उतारकर निकलना पड़ता है। गांववासियों का मानना है कि लोगों को हमेशा शांति का परिचय देना चाहिए। इसलिए शांगढ़ गांव के लोग काफी शांत स्वभाव के होते हैं। इस गांव में कभी भी किसी भी बात को लेकर कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है।

उपद्रवियों ने मंदिर में लगा दी थी आग

गौरतलब है, साल 1998 में कुछ उपद्रवियों ने इस गांव में आग लगा दी थी जिसमें इस पवित्र देवास्थान को भी फूंक दिया गया था। इस आग में गांव वालों के कई घर जलकर राख हो गए थे। इस सबके बावजूद गांववासियों की आस्था ईश्वर के प्रति कम नहीं हुई। उन लोगों ने इस मंदिर का पुनर्निमाण कराया और गांव की परंपरा को पुनर्जीवित रखा।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *