Breaking News

देश का अनोखा स्कूल जहां छात्र ही ‘टीचर और प्रिंसिपल’, जानिये कहां है

शिक्षा के मंदिर को स्कूल कहते हैं। यहां छात्र अपने गुरुओं से अच्छे संस्कार और ज्ञान प्राप्त करते हैं। उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक ज्ञान भी दिया जाता है जिससे कि वे भविष्य में एक अच्छे इंसान बन सकें। कहते हैं एक स्कूल को स्कूल वहां के शिक्षक और प्रधानाचार्य मिलकर बनाते हैं। जिस स्कूल में इन दोनों की कमी रहती है वह स्कूल, स्कूल की जगह एक सब्जी मार्केट से कम नहीं होता है।

हालांकि, इस देश में एक ऐसा भी विद्यालय है जहां छात्रों को पढ़ाने के लिए न तो अध्यापक हैं और न ही उन्हें अनुशासित करने के लिए प्रधानाचार्य। इसके बावजूद छात्र-छात्राएं यहां पढ़ती हैं और अच्छे गुण सीखती हैं।

यूपी में स्थित है स्कूल

यह अनोखा विद्यालय उत्तर प्रदेश के महोबा में स्थित है। नदी किनारे स्थित इस स्कूल का नाम तीरथ सागर स्कूल है। इस स्कूल में न ही अध्यापक हैं और न ही शिक्षक। लेकिन यहां के छात्र पढ़ाई के महत्व को समझते हैं इसलिए वे स्वयं ही अपनी पढ़ाई करते हैं।

8 बजे शुरु होती हैं क्लासेस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां रोज सुबह 8 बजे से क्लास शुरु होती है। इस क्लास में जो छात्र गणित में होशियार होता है वह सभी बच्चों को गणित की शिक्षा देता है। वहीं, जो छात्र अंग्रेजी में तेज़ होता है वह अन्य बच्चों को अंग्रेजी की तालीम देता है। ऐसे करके ये छात्र खुद ही अध्यापक बनकर एक-दूसरे को शिक्षित करते हैं। यही कारण है कि इस स्कूल से निकलने वाले छात्र आज किसी न किसी उच्च पर पर बैठे हुए हैं।

खुद करते हैं प्राब्लम सॉल्व

जानकारी के अनुसार, इस स्कूल में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के वो बच्चे आते हैं जिनके माता-पिता उनकी शिक्षा के लिए पैसा खर्च करने में असमर्थ होते हैं। ये बच्चे अपने भविष्य को लेकर इतने सजग हैं कि इन्होंने अध्यापक और प्रधानाचार्य के आने की राह देखना बंद कर दिया है। अब वे रोज़ एक टॉपिक सेलेक्ट करते हैं और उसे आसानी से मिल-जुलकर खत्म करते हैं।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.