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लाखों का पैकेज छोड़कर किरन वर्मा ने उठाया रक्तदान के प्रति लोगों को जागरुक करने का जिम्मा, जानिये कैसे

इस देश में रक्तदान को महादान के बराबर माना जाता है। आपने अक्सर इस तरह की कहावत कहीं न कहीं जरुर सुनी होगी। लेकिन क्या आपने कभी सोंचा है कि हमें इसपर अमल करना चाहिए? जवाब है नहीं, हमारे आस-पास तमाम ऐसे लोग मौजूद होते हैं जिनका रक्तदान को लेकर अलग ही नज़रिया होता है। उनका मानना है कि जिसको जरुरत होगी वो अस्पताल से ले लेगा जाकर। लेकिन इन लोगों को यह समझ में नहीं आता कि जब आप जैसे लोग खून देने ही नहीं जाओगे तो अस्पताल में आएगा कहां से।

इस तरह की मानसिकता के लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक शख्स ने जागरुकता अभियान की शुरुआत की है। यह शख्स पूरे देश का पैदल भ्रमण करते हुए लोगों को रक्तदान के प्रति जागरुक करता है। बता दें, इस व्यक्ति का नाम किरण वर्मा हैं। 34 वर्षीय किरण पूरे देश में पैदल भ्रमण करते हुए लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि 2026 तक देश में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु रक्तदान की वजह से न हो।

1500 में बेचा गया खून

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2016 में किरण अपनी नौकरी से घर लौट रहे थे। इस दौरान उनके पास एक अजनबी महिला का फोन आया जिसने उनसे अपने पति की बचाने के लिए खून की मांग की। किरण ने अस्पताल जाकर रक्तदान किया। इसके कुछ दिनों बाद उन्हें पता चला कि उनका खून चंडीगढ़ की एक गरीब, असहाय महिला को 1500 रुपये में बेंचा गया था।

एक समाचार पत्र से इस वाकिये के विषय में बात करते हुए किरण ने बताया था कि उन्हें यह बात जानकर काफी हैरानी हुई कि एक गरीब, असहाय महिला जो अपने पति की जान बचाने के लिए वैश्यावृत्ति तक करने को तैयार है उसे 1500 रुपये में खून की बोतल बेंचना कहां का न्याय है? इस घटना ने किरण को अंदर से झकझोर कर रखा दिया। उनके दिमाग में एक सवाल घूम रहा था कि इस महिला के अलावा भी इस देश में कई ऐसे लोग होंगे जिन्हें खून की जरुरत होगी लेकिन वे इस तरह की धांधली का शिकार होते होंगे।

अब तक बचाई 35000 लोगों की जान

समाज की इस समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से दिल्ली निवासी किरण वर्मा ने अपनी लाखों की पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और ‘चैंज विद वन’ नामक संस्था की स्थापना करी। इस संस्था के तहत उन्होंने वर्चुअल, लोकेशन-बेस्ड ब्ल्ड डोनेशन वेबसाइट और ऐप, सिम्प्ली ब्लड भी बनाया। इसकी मदद से अब तक 35000 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

जानकारी के अनुसार, 19 वर्ष की आयु से लेकर अब तक किरण लगभग 46 बार रक्तदान कर चुके हैं। अब वह लोगों को प्रेरित करने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। उनकी यह यात्रा 50 दिनों पहले दिल्ली से शुरु हुई थी, जो कि अब तक मदुरई पहुंची है। वे अपने हाथ में माइक लेकर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरुक करने का प्रयास कर रहे हैं।

2026 तक लोगों को रक्तदान के प्रति जागरुक करने का उद्देश्य

किरण ने अपने इस मिशन के विषय में बात करते हुए मीडिया से कहा था कि, ‘मेरा मिशन है मैं लोगों को जागरूक करूं ताकि 2026 के बाद देश में ख़ून की कमी से किसी की मौत न हो। ख़ून की उपलब्धता और ज़रूरत के बीच का जो अंतर है उसे जनता के सामूहिक प्रयासों से ख़त्म किया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि, ‘जब देश एकजुट होकर पोलियो को हरा सकता है तब ख़ून की कमी से होने वाली मौतों को भी बिना किसी ख़र्च के रोका जा सकता है।’

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