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चीन में मिला फूल का 164 मिलियन साल पुराना जीवाश्म, जानिए

फूल प्रकृति का ऐसा तोहफा जिसने इंसान की ज़िंदगी में रंग भरने का काम किया। फूल की खुशबू से इंसान की जिंदगी महकने लगती है। ऐसे में कई लोग इसका व्यापार करते हैं और अपना जीवनोपार्जन करते हैं। फूल का उपयोग इत्र बनाने के लिए भी किया जाता है। उत्तर प्रदेश का कन्नौज जिला इत्र के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इस शहर में इत्र का व्यापार मुगलकाल से होता आ रहा है। यहां गुलाब, मोगरा, सूरजमुखी, बेला ना जाने कितने फूलों की खुशबू निकाली जाती है। कन्नौज में फूल की खुशबू को कांच की शीशी में बंद करके उसे देश-विदेश में बेचा जाता है।

आज हम आपको फूल की उत्तपत्ति को लेकर विशेष जानकारी देने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि फूलों की उत्पत्ति जुरासिक पीरियड यानी कि 145 मिलियन साल पहले हुई थी। हालांकि, चीन में फूल का एक ऐसा जीवाश्म मिला है जो वैज्ञानिकों के इस दावे को सिरे से खारिज करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के इनर मंगोलिया क्षेत्र में में 164 मिलियन साल पुराने फूल का जीवाश्म पाया गया है। इसने सभी को चौंका कर रख दिया है। बता दें, इसकी लंबाई 4.2 सेंटीमीटर और चौड़ाई 2 सेंटीमीटर है। इसमें एक डंठल, पत्तियां और एक छोटी सी कली है। वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति का नाम फ्लोरिजेमिनिस जुरासिका रखा है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह पौधा ज्वालामुखी की राख से बने पीले रंग के पत्थरों में संरक्षित था। उनका दावा है कि ज्वालामुखी विस्फोट में पौधे के पत्ते तबाह हो गए लेकिन उनकी छाप हमेशा के लिए पत्थरों पर क़ैद हो गई। गौरतलब है, पौधे दो प्रकार के होते हैं। पहला एंजियोस्पर्म और दूसरा जिम्नोस्पर्म। जो पौधे फूल देते हैं उन्हें एंजियोस्पर्म कहा जाता है जबकि जो पौधे फूल नहीं देते हैं उन्हें साइंस की भाषा में जिम्नोस्पर्म कहा जाता है।

जानकारी के मुताबिक, चीन में मिलने वाले जीवाश्म को देखकर दावा किया गया है कि ये एंजियोस्पर्म है। वहीं, अब तक जिन एंजियोस्पर्म के जीवाश्म पाए गए थे उनसे यही साबित हुआ था कि क्रेटेशियस पीरियड के थे यानी 6.6 करोड़ से 14.5 करोड़ साल के बीच एंजियोस्पर्म की उत्पत्ति नहीं हुई थी। हालांकि, जो जीवाश्म चीन के मंगोलिया क्षेत्र में मिला है उससे इन अवधारणाओं पर रोक लग जाती है।

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