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गांव वालों की 20 सालों की मेहनत ने बदली बजंर धरती की किस्मत, उगा दिया 1030 एकड़ जंगल

इस बात से तो आप सब वाकिफ ही हैं कि बढ़ती आबादी पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक साबित हो रही है। कई राज्यों के सरकारें इस दिशा में काम भी कर रही हैं जिससे प्रकृति को होने वाले नुकसान से सुरक्षित रख जा सके। आज हम आपको एक ऐसे गावों के विषय में बताने जा रहे हैं जहां के लोगों ने 20 सालों की कड़ी मेहनत के बाद बंजर जमीन पर घना जंगल उगा दिया।

20 सालों में तैयार हुआ जंगल

बता दें, मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत आने वाले मानेगांव और डूंगरिया नामक गांव के लोगों ने 20 सालों तक प्रकृति की सेवा की और 1023 एकड़ की बंजर जमीन पर घना जंगल उगा दिया।

इफको की परियोजना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत इफको ने अपनी एक परियोजना के दौरान की थी। 12 अक्टूबर 1998 को पायलट परियोजना के तहत संस्था ने एक जंगल विकसित करने का फैसला लिया था। इसके लिए एक बंजर जमीन पर 2 लाख से अधिक पेंड़ लगाए गए थे। बताया गया था कि इन पेड़ों से स्थानीय लोगों को रोजगार और ईंधन मिल सकेगा।

फंडिंग हुई बंद

बाद में, पेंड़ लगाने की इस परियोजना को भारत-कनाडाई पर्यावरण सुविधा ने फंड देने का भी ऐलान किया था। इसके तहत गांववासियों को पेंड़ों की देखभाल के लिए प्रतिमाह 5 हजार रुपये भी दिए जाते थे। साल 2002 में भारत-कनाडाई पर्यावरण सुविधा का फंड खत्म हो गया जिसके बाद गांववासियों को इन पेंड़ों की देखभाल और खाद-पानी के मिलने वाली राशि भी बंद हो गई। ऐसे में लोगों ने काम करना बंद कर दिया। जिसके बाद बिना देखभाल के कई पेंड़ कुछ ही महीनों में मर गए।

रजनीश ने बताई पेड़ों की महत्वता

जानकारी के मुताबिक, इस परिस्थिति में स्थानीय किसान और सामाजिक कार्यकर्ता रजनीश मिश्रा ने गांववासियों को पेड़ों की देखभाल के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पेड़ों की कमी से भविष्य में होने वाली दिक्कतों से गांववालों को अवगत कराया। इसके बाद निस्वार्थ भाव से गांव के लोगों ने इन पेंड़ों की सेवा की। इन्हें समय से खाद-पानी दिया जाने लगा जिसके बाद ये पेंड़ फिर से जीवित हो गए। गौरतलब है, 20 सालों में यहां बहुत बड़ा जंगल तैयार हो चुका है। इन जंगलों में 70 प्रतिशत से अधिक सागवान के पेंड़ हैं।

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